आज शबे कद्र की रात उनके दिल में बसता है कुरान, देश- प्रदेश में लगातार एक ही मस्जिद में सबसे लंबे समय तक हाफिज व इमाम रहे शख़्स की कहानी

 

850 पेज का कुरान कंठस्थ कर 50 साल से तरावीह में पढ़ा रहे हैं 

 

कुक्षी रमजान माह अब ढलान पर है और शुक्रवार को संभवत: ईद उल फितर मनाई जाएगी। वही इस मुबारक माह रमजान में रोजेदारों को जिस फजीलत वाली रात का बेसब्री से इंतजार रहता है वह रात 9 मई रविवार को होगी। इसे शबे कद्र की रात कहा जाता है। इस्लाम की बुनियाद व पवित्र धर्म ग्रंथ कुरान इसी रात में अल्लाह ने मुकम्मल किया था। जिसे नाजिल होने में पूरे 23 साल लगे। आज देश व दुनिया में कुरान को कंठस्थ कर बिना देखे पढ़ने व लिखने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक है। दरअसल मुस्लिम समाज में जो लोग पूरा कुरान कंठस्थ कर उसको बिना देखे पढ़ सकता है, उसे हाफिज कहा जाता है। रमजान में तरावीह की नमाज में हाफिज बिना देखे कुरान पढ़ते हैं, जिन्हें नमाज में पीछे खड़े लोग सुनते है। मुस्लिम समाज में हाफिज लोगों का स्थान सर्वोपरि होता है। वैसे अब लगभग सभी जगह काफी कम उम्र में हाफिज बन लड़के निकल रहे है, जिन्हें दारुल उलुम में शिक्षा दी जाती है।

 

हाफिज लोग रमजान के 30 दिनों में ईशा की नमाज के बाद विशेष तरावीह की नमाज में हर दिन कुरान का सवा या डेढ़ पारा बिना देखे नमाज के दौरान पढ़कर पीछे खड़े नमाजियों को सुनाते हैं व इस तरह वेे शबे कद्र की रात तक पूरा कुरान मुकम्मल कराते हैं।

 

ऐसे ही एक शख्स है कुक्षी मरकज- ए – अहले सुन्नत बढ़पुरा मस्जिद के हाजी व हाफीज मोहम्मद अशफाक अशरफी साहब, जिनके दिल में कुरान बसता है। खास बात यह है कि हाफिज अशफाक 1972 से लेकर अब तक लगातार रमजान के दिनों में तरावीह की नमाज पढ़ाते आ रहे हैं और अपने द्वारा कंठस्थ किए हुए हैं कुरान को बिना देखे सुनाते आ रहे हैं। समाज के लोगों का दावा है कि देश, प्रदेश में वह संभवत: पहले ऐसे शख्स हो सकते हैं जो लगातार 50 साल से तरावीह की नमाज में कुरान पढ़ाते आ रहे हैं। उनके बारे में एक खास बात यह भी है कि आज जो हाफिज कुरान होते हैं वह अपने कुरान की कंठस्थ पढ़ाई दारुल उलूम में पूरी किया करते हैं लेकिन हाफिज अशफाक ऐसे शख्स हैं जिन्होंने कुक्षी की मस्जिद में रहते हुए ही उस जमाने में महज 16 साल की उम्र में पुरा कुरान उनके गुरु हाजी हाफिज मोहम्मद हुसैन खत्री के नेतृत्व में कंठस्थ किया था। हाफिज अशफाक साहब ने मरकज -ए -अहले सुन्नत बढ़पुरा मस्जिद में 1982 से लेकर लगातार 2018 तक 36 साल इमामत भी की है। लगातार इमामत का यह भी एक रिकार्ड है। उन्हें खलीफा-ए- सरकारे बुरहानपुर ने ‘पीर साहब’ की उपाधि से भी नवाजा है। गत वर्ष व इस वर्ष लॉक डाउन होने की वजह से मस्जिद के बजाय वे घर पर रहते हुए अपने परिजनों व परिचितों को तरावीह की नमाज अदा कर रहे हैं।

ये एक रिकार्ड है…

 

79 साल के हाजी शरीफ खान रिटायर्ड पटवारी का कहना है कि मैने पूरे 50 साल हाफिज़ अशफ़ाक़ अशरफी के द्वारा रमज़ान माह में पढ़ाई जाने वाली विशेष तरावीह की नमाज़ अदा की है, ये अपने आप मे एक रिकॉर्ड है कि एक ही हाफिज़ ने एक ही जगह लगातार 50 साल तक रमज़ान में तरावीह पढ़ाई हो।

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