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लचर स्वास्थ्य सेवाऐ जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक नही नवागत कलेक्टर को इलाज के लिये जाना पडा इन्दौर

Juber new

जिला चिकित्सालय बना रेफर मे नम्बर वन यहा हर दुसरे मरीज को रेफर किया जाता है खुद जिला अधिकारी रेफरी की भुमिका निभा रहे है

 

अलिराजपुर मे स्वास्थ व्यवस्था ठिक नही है यदि ठिक है तो कलेक्टर ईलाज के लिए इन्दोर क्यो गये डेगुं का ईलाज तो स्थानिय स्तर पर ही आम जनता कि तरह हो जाता पूछती है अलिराजपुर की जनता ?

जिला स्वास्थ्य अधिकारी क्यो है मौन जिले मे मामूली फेक्चर हो या डेंगू मलेरिया या अन्य बिमारी हो हर किसी को रेफर किया जाया है। बावजूद इसके जिला प्रशासन मौन क्यो है। आपको बता दे पुर्व कलेक्टर सुरभि गुप्ता ने कही बार जिला चिकित्सालय का निरिक्षण किया हर बार वादा किया की वयवस्था बहतर की जाएगी मगर जमीनी स्तर पर हालत और बदतर नजर आ रही है अब देखना है नवागत कलेक्टर मनोज पुष्प जिला चिकित्सालय की लचर वयवस्था सुधार पाते है या नही क्यो की जिले वासियो को अब नवागत कलेक्टर साहब से काफी उम्मीदें लगी है।

जिले के नवागत कलेक्टर मनोज पुष्प डेंगू से पीड़ित पाए गए हैं। तीन दिन पहले बुखार आने पर लक्षणों के आधार पर उनकी जांच कराई गई थी। इसमें प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पाजिटिव आई है कलेक्टर मनोज पुष्प फिलहाल इंदौर में उपचार करा रहे हैं। सिविल सर्जन डा.केसी गुप्ता ने बताया कि कलेक्टर को बुखार आने पर उनकी जांच कराई गई थी। इसमें प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके कलेक्टर इंदौर में उपचार ले रहे हैं। उनकी स्थिति फिलहाल बेहतर है। डा. गुप्ता के अनुसार जिले में अब तक डेंगू के नौ मामले सामने आ चुके हैं। सभी को जिला अस्पताल में उपचार दिया गया। स्वस्थ होने के बाद सभी को डिस्चार्ज कर दिया गया है। बढ़ते मामलों को देखते हुए आमजन को डेंगू से बचाव की सलाह दी जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि बुखार, दर्द सहित कोई भी तकलीफ होने पर तत्काल डाक्टर को दिखाएं। डाक्टर की सलाह अनुसार ही उपचार लें। कोई भी परेशानी होने पर कतई देर न करें। सरकारी आंकड़ों से ज्यादा मरीज, कई सीधे निजी अस्पताल पहुंच रहे।

सरकारी आंकड़ों में डेंगू के 9 ही मरीज दर्ज हैं, जो शासकीय चिकित्सालय में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। बताया जाता है कि बड़ी संख्या में बुखार से पीड़ित लोग

सीधे पास के छोटा उदयपुर, दाहोद, बड़ौदा जाकर उपचार करा रहे हैं। इस कारण मरीजों का सही आंकड़ा सामने नहीं आ पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में कई लोग झोलाछापों

के पास जाकर भी इलाज करा रहे हैं। इस कारणबीमारी के बारे में सहीजानकारीनहीं मिल पाती और कराऐ भी क्यो नही जिला चिकित्सालय तो रेफर का अड्डा बना हुआ है हर दुसरे मरीज को यहा रेफर किया जा रहा है ताकी आस पास के नीजी अस्पताल से मोटा कमीसन मिल सके

 

अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं नहीं

जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं नहीं मिलने पर घायल व गंभीर मरीजों को इलाज के लिए गुजरात जाना पड़ रहा है, जबकि समय पर इलाज नहीं मिलने से कई बार घायलों व रोगियों को जान तक गंवानी पड़ी है। जिला अस्पताल में यह हालत लंबे समय से है, विशेषज्ञ नहीं होने से यहां तैनात डॉक्टर गंभीर रोगी व घायलों का इलाज करने की रिस्क नहीं उठाते। यहां बताना जरूरी है कि जिला अस्पताल में पसरी अव्यवस्थाओं को दूर करने की मांग को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित अफसरों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन कार्रवाई के अभाव में व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रहीं।

 
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