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नवीन शासकीय महाविद्यालय सोंडवा के गोद ग्राम खामट के उपरला फलिए में विश्व स्तनपान सप्ताह पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

नवीन शासकीय महाविद्यालय सोंडवा के गोद ग्राम खामट के उपरला फलिए में आज दिनांक 01 अगस्त 2022 को पर आजादी के अमृत महोत्सव के परिप्रेक्ष्य में विश्व स्तनपान सप्ताह पर महिलाओं एवं शिशु के पोषण आहार पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया । प्राचार्य डॉ. भूपेंद्र तिवारी के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता अंकिता सिकरवार(CHO) एवं नूतन सोलंकी (RKSK COUNSLER) रहे ।

सर्वप्रथम इस कार्यक्रम की शुरुआत मैं संयोजक प्रोफेसर विशाल देवड़ा ने मुख्य वक्ता शासकीय चिकित्सालय सोंडवा के अंकिता सिकरवार(CHO) एवं नूतन सोलंकी (RKSK Counsler) का स्वागत किया एवं किया तत्पश्चात अंकिता सिकरवार ने ग्रामीण महिलाओं को स्तनपान का महत्त्व एवं उद्देश्य बताएं उसमें महिलाओं को बच्चे को पहले 6 महीनों में किसी भी तरह का वाणिज्यिक दूध जैसे कि सूखा दूध या कृतिम आहार पेय या यहां तक कि बच्चे के लिए आवश्यक पानी नहीं देना चाहिए, सिकरवार जी ने यह भी बताया कि बच्चों को 6 महीने तक मां का दूध ही पिलाएं उसे ऊपरी जैसे गाय ,भैंस , थेलियो का दूध नहीं पिलाना चाहिए और ना ही पानी पिलाना चाहिए क्योंकि उससे बच्चा बीमार होता है एवं दस्त हो जाते हैं बुखार आने लगता है बच्चे को गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ता है और कभी-कभी ऐसा भी होता है कि बच्चे की मृत्यु भी हो जाती है साथ ही यह भी समझाया कि नवजात शिशु को कभी भी लेट कर दूध ना पिलाए उसे बैठकर ही दूध पिलाए और किस पोजीशन में उसे पिलाना है वह भी बताया बच्चे को तुरंत ही दूध पिला कर उसको सोने के लिए नहीं रखना चाहिए अन्यथा नवजात शिशु की जो नलिया ग्रंथियां होती है वह बहुत ही छोटी छोटी होती है उसमें वह दूध पच नहीं पाता और नलियो में एकत्रित हो जाता है जिससे बच्चे की सांस लेने की क्षमता कम हो जाती और वह मर भी सकता है बच्चे को जैसे ही दूध पिलाएं उसे अपने से चिपका रखे और उसकी पीठ पर 10 मिनट या 5 मिनट थपली लगाए जिससे बच्चे को डकार आजाये और दूध पच सके बहुत सी महिलाएं अपने नवजात शिशु को लेट कर दूध पिलाने में सक्षम होती रहती है परंतु यह नहीं समझते कि बच्चे को तकलीफ होगी वह असमय मृत्यु हो सकती है साथ ही सिकरवार जी ने बताया कि मां के दूध में एंटीबायोटिक होते हैं जिससे कि बच्चे को गंभीर बीमारियों को रोकने की क्षमता होती है उन्होंने अंतर बताते हुए कहा कि अगर कोई मां अपने बच्चे को 6 महीने सिर्फ स्तनपान करवाती है एवं कोई मां अपने बच्चे को स्तनपान के साथ ऊपरी दूध पिलाती है तो वह जल्दी बीमार होता है परंतु 6 महीने तक सिर्फ स्तनपान करने वाला बच्चा स्वस्थ रहता क्योंकि मां के दूध में एंटीबायोटिक होता हैं साथ ही ग्रामीण महिलाओं को साफ सफाई से रहना एवं उचित पोषण आहार खाने के बारे में समझाया जिससे की वह स्वस्थ रहे तो बच्चे भी स्वस्थ रहेंगे तत्पचात नूतन सोलंकी (RKSK Counsler) ने ग्रामीण महिलाओं को बताया कि सभी धात्री महिलाओं को दूध पिलाने के तरीके एवं सावधानी के बारे में बताया गया साथ ही बच्चे को कितने माह तक मां का ही दूध पिलाना है बताया गया दूध पिलाने से बच्चों को रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है एवं बच्चा स्वस्थ और पोषित रहता है साथ ही मां को भी बच्चे से भावनात्मक तरीके से जुड़ा रहता है धात्री महिलाओं को आयरन की गोली नियमित खाना एवं पोषण आहार लेना अनिवार्य है तथा बच्चों में 3 वर्ष का अंतराल रखना अनिवार्य है जिससे बच्चे को मां का दूध एवं स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है कार्यक्रम के अंत में संयोजक प्रोफेसर विशाल देवड़ा ने अंकिता सिकरवार (CHO) एवं नूतन सोलंकी(RKSK Counsler) को धन्यवाद किया ।

कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीण महिलाएं नेरली,गुड्डी,रवीना, झुना, धनबाई आदी महिलाएं कार्यक्रम में उपस्थित रही । कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र संजय चौहान , रंजिला जमरा, मनीषा बघेल ,ऋतु एवं कर्मचारी गोविंद सोलंकी का सहयोग रहा ।

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