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अलीराजपुर जिले में राजनैतिक दबाव के कारण किये गये शिक्षकों के स्थानातंरण जिला प्रशासन ने आदिवासी कर्मचारियों को किया टारगेट

Irfan barkati

इरफान बरकाती की रिपोर्ट ✍🏻
जयस जिसका घोर विरोध करता हैं,जिला प्रशासन आदेश निरस्त नही करता है तो करेंगे उग्र आंदोलन
 
 
 
 
 

अलीराजपुर:- एक और राज्य सरकार अपने आप को आदिवासियों की हितेषी बताकर आदिवासी जनता को लॉलीपॉप दे रही है,यहीं अलीराजपुर जिले में हाल ही में किये गए कर्मचारियों के स्थानांतरण में वर्ग विशेष आदिवासी वर्ग के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को ही टारगेट कर स्थानांतरण किया गया है।जिससें जयस के राज्य प्रभारी मुकेश रावत नाराजगी व्यक्त करते कहा कि यही प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन द्वारा भारी राजनैतिक दबाव में नियम विरुद्ध काम कर आदिवासी कर्मचारियों को प्रताड़ित करते हुए परेशान किया जा रहा है।जिसका आने वाले समय में आदिवासी समाज मुंहतोड़ जवाब देगा। यहां तक कि महिला शिक्षिकाओं को भी नही छोड़ा उनका स्थानांतरण 70-80 सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में किया गया है, जहाँ ना तो कोई आवागमन का साधन चलता है, ओर ना ही कोई रुकने की व्यवस्था है,ऐसे में प्रश्न उठता है कि जिला प्रशासन स्थानीय नेताओं के दबाव में मध्यप्रदेश कर्मचारी स्थानांतरण नीति के विरुद्ध अनैतिक कार्य किया गया है,जिसका हम विरोध करते हैं।

एक ओर माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थानांतरण नीति में पति-पत्नी अलग-अलग जगह पर शासकीय सेवा दे रहे हैं तो एक ही मुख्यालय में स्थानांतरण के लिए पॉलिसी बनाई गई हैं,जबकि यहां कई महिला कर्मचारियों के छोटे-छोटे बच्चे हैं,उनके पति-पत्नी साथ में एक ही मुख्यालय पर निवास कर अपने अपने कार्यव्य का ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं, उन्हें भी 70-80 किलोमीटर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कोई आवागमन का साधन नही है, ऐसी जगह पर स्थानांतरण कर महिला शक्ति करन की बात करने वाली शिवराज सरकार साबित कर दिया कि महिलाओं के प्रति कितनी गंभीर है।

जयस जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह चौहान ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य अलीराजपुर जिले में लगभग 400 से अधिक स्कूलों में शिक्षक ही नही है,कई वर्षों से शिक्षक विहीन शालाए संचालित होने के बाद भी नियम विरुद्ध भेदभावपूर्ण,आदिवासी वर्ग विशेष के शिक्षकों एवं कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया है। कई शिक्षकों के पूर्व प्रशासनिक स्थानांतरण की अवधि 3 वर्ष पूर्ण नही होने के बाद भी उन्हें अन्यत्र भेजा गया है।जिले के नेता नही चाहते हैं कि में शिक्षा का स्तर बढ़े ओर उसमें सुधार हो।

जिले के अधिकारी इतने अंधे हो गया है कि जिन चतुर्थ कर्मचारी दैनिक मजदूरी दर, कांटीजेंसी दर वाले कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण की पात्र ही नही है उनके लिए सरकार की कोई नीति ही नहीं बनी हैं,उन्हें भी स्थानांतरण कर 60-70 किलो मीटर की दूरी पर भेजा गया है।

सामान्य प्रशासन विभाग मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो पदावधि के लिए स्थानांतरण में विशेष छूट का प्रावधान होने के बाद भी उन्हें भी स्थानांतरण किया गया है,जिससें यह प्रतीत होता है कि पूरी जारी स्थानांतरण आदेश सूची राजनैतिक दबाव में बना जांच पड़ताल नियम विरुद्ध ही जारी की गई है।

जयस जिला अध्यक्ष अरविंद कनेश ने कहा कि उक्त आदेशो को निरस्त नही किया जाता है,तो कर्मचारी हित मे उग्र आंदोलन किया जायेगा।जयस परिवार कर्मचारियों के साथ हमेशा रहा है और रहेगा।आगामी समय में जोबट विधानसभा में चुनाव होना है,जिसमें आदिवासी समाज मुंहतोड़ जवाब देगा।

जिले के कर्मचारीयों को दबाव में आने और डरने की जरूरत नही है,बीईओ एवं संकुल प्रचार्य भी दबाव में शिक्षकों को परेशान कर रहे हैं,जो कि अच्छी बात नही है,क्योंकि पीड़ित शिक्षकों को वरिष्ठ अधिकारीयों से अपील का प्रयाप्त समय दिया जावे, वैसे भी एक सप्ताह बाद बेक डेट में शिक्षकों को आदेश जबरन पकड़ाए जा रहे हैं।जिसका हम घोर विरोध करते हैं।. .

 
 
 
 
 
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