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फिर 108 मे जन्मी महिला जच्चा बच्चा दोनो स्वास्थ्य, सकुशल कराई डिलेवरी EMT पायलट की सूझबूझ से कराई डिलेवरी

फिर 108 मे जन्मी महिला जच्चा बच्चा दोनो स्वास्थ्य, सकुशल कराई डिलेवरी EMT पायलट की सूझबूझ से कराई डिलेवरी

जिला अस्पताल रेफर सेंटर’ बनकर रह गया, कोन निभा रहा है रेफरी की भुमीका।

इरशाद मंसुरी/ जुबेर निजामी

आलीराजपुर का जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर की सुविधा से युक्त है। हालांकि हकीकत यह है कि बीते कई सालों से यहां ट्रामा सेंटर सिर्फ नाम के लिए ही है। सरकार ने भारी-भरकम राशि खर्च दिखाने को सेंटर के लिए भवन बना दिया,  सेंटर में कई जरूरी संसाधनों का भी अभाव है। ऐसे में गंभीर घायल मरीजों को यहां से अन्य शहरों में रेफर करना पड़ रहा है। करोड़ रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर का निर्माण इस उद्देश्य से किया था कि दुर्घटना होने पर गंभीर घायलों को यहीं उपचार मिले सके और रेफर करने की स्थिति नहीं आए। भवन बनने के बाद नवंबर 2016 में इसका शुभारंभ किया गया था। 

108 मे हुई डिलेवरी

नानपुर पंचायत के ग्राम सेजगॉव के नदी पार फलिया कि गर्भपति महिला भूरी बाई पति नवल सिंह उम्र 24 वर्ष को 108 के माध्यम से पस्तुता को अलीराजपुर लाया जा रहा था जिसको कुछ ही किलोमीटर पर दर्द शुरू हो गए महिला को दर्द से तडपता देख EMT और पायलट द्वारा गाडी को साईट मे खडाकर प्रसव कराया जिसमे माँ और बच्चा दोनो सुरक्षित है। भगतसिंह कलश EMT, दिलीपसिंह आवासीय पायलट का सराहनीय योगदान रहा इस योगदान मे डिस्ट्रिक्ट मेनेजर अरविंद भवैल की टीम की जितनी सराहना की जाए कम है 108 कई सुविधाए जिले मे बेहतर सुविधाए दे रही है।

एक दिन मे 10 मरिज रेफर जिला अस्पताल रेफर सेंटर’ बनकर रह गया

आखिर कब तक अलीराजपुर जिला चिकित्सालय मे बेठे डाक्टर रेफरी की भुमिका निभाएंगे एक बार नही कही बार 108 मे डिलेवरी हो गयी है। आखिर कब तक कमीशन के चक्कर मे भोले भाले आदिवासियो की जान के साथ खिलवाड होता रहेगा अलीराजपुर जिला चिकित्सालय से 8/1/2024 को एमरजेन्सी एम्बुलेंस 108 के 10 वाहनो मे से अधिकतर वाहन रेफर मे बडौदा दाहोद इन्दौर के लिए रेफर किए गए ऐसे मे यदि एमेरजेन्सी मे कोई जरुरत आ जाए तो 108 वाहन न होने से और भी मरिजो की जान का खतरा हो सकता है।

निजी हॉस्पिटल के एजेन्ट

अलीराजपुर जिला चिकित्सालय मे पदस्थ डाक्टर व अन्य स्टाफ देते है। प्रायवेट हॉस्पिटल मे सुविधाए और मरिजो को भी प्रायवेट मे ले जाने के लिए करते है। मोटीवेट जिला चिकित्सालय मे आये दिन निजी हॉस्पिटल के एजेन्ट घुमते मिलेगे जो मरिजो के परिजनो को बहला फुसला कर अपने निजी हॉस्पिटल मे ले जाते है और दुगना पैसा वसूलते है।

ट्रामा सेन्टर बनने के बाद  भी नही मिल रही पर्याप्त सुविधाए 

जिला अस्पताल में ना कोई सुविधाएं है। नही कोई इमरजेंसी इंतजाम जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की भोली भाली जनता को प्रार्यवेट हॉस्पिटल में जाना पड़ता है। वहाँ जाने पर मरीज को कोई ग्यारंटी नही है। सरकार बड़े बड़े दावे करती पर जमीनी हकीकत कुछ और बया कर रही है। अभी कुछ दिन पूर्व एक महिला को प्रार्यवेट हॉस्पिटल में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। अगर जिले में करोड़ो की लागत से ट्रामा सेंटर बना दिया पर सुविधाओं के नाम पर जीरो है। साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। अब तक न पर्याप्त डाॅक्टर हैं। और न ही जांच मशीन का उपयोग हो पा रहा है। लिहाजा जिले के मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है। आर्थिक स्थिति से कमजोर लोग भी छोटे से बड़े इलाज के लिए अब शासकीय के बजाए प्राइवेट अस्पताल में जाना पसंद करते हैं, क्योंकि अब लोगों में यह धारणा हो गई है कि अस्पताल में डाॅक्टर तो मिलेंगे ही नहीं, ऐसे में वहां क्यों जाए। कुछ मरीजों से प्राइवेट में जाने का कारण पूछा तो कहा कि शासकीय अस्पताल में इलाज तो होता है लेकिन देरी होती है। इसलिए प्राइवेट में जाना ही उचित है।भले ही जिम्मेदार अधिकारी दावे करते हैं कि यहां पर्याप्त सुविधाएं है

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