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प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सामाजिक कार्यकर्ता ने इस्तीफा मांगा

चुनावी तैयारियों में समय देने के बजाय एक वर्ष कोरोना महामारी से लड़ने में समय देते तो हालात आज सुधरे हुए होते

नैतिक जिम्मेदारी का अहसास कर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दीजिए मोदीजी – सोमेश्वर पाटीदार

कुक्षी:- विश्वव्यापी कोविड-19 कोरोना महामारी से एक वर्ष से भी अधिक समय से हमारे देश का जनमानस संघर्ष करते हुए परेशान है। आपके द्वारा पिछले वर्ष से विभिन्न प्रकार के बचाव हेतु नियमों व दिशानिर्देश जारी कर प्रशासन के माध्यम से आमजनों को शादी, शवयात्रा, व्यापार व अन्य सभी कार्य व सावधानियां रखने के लिए पालन करवाने के प्रयास किये गए है। पिछले वर्ष भी लम्बे समय लॉकडाउन व जनता कर्फ्यू करवाया गया था। शासन-प्रशासन के नियमों का पालन देश की जनता ने सम्मानपूर्वक किया भी और आज भी कर रहे है। उक्त बात सामाजिक कार्यकर्ता सोमेश्वर पाटीदार ने प्रधानमंत्री को इस्तीफे के लिए लिखे गए पत्र में लिखी है।

 
पाटीदार ने कहा कि,

अब तो सरकार द्वारा वैक्सीन टीकाकरण कार्य भी जारी है। परन्तु महोदय, आज जो हालात एक वर्ष बाद कोरोना की दूसरी लहर से देख रहे वह बहुत ही पीड़ादायक है। आज यह स्थिति हो गई है कि, अस्पतालों में बेड नही, ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ है। दवाइयों के लिए भी लोग तरस रहे और कई गुना दामों में ब्लैक में बिक रही है। बड़े ही दुख के साथ लिख रहा हूं कि, आज की हालत के सबसे ज्यादा जिम्मेदार हमारे अपने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ही है।

कोरोना को लेकर आपने दोहरा मापदंड रखा है

आपने आम जनमानस के लिए तो सभी नियमों को थोपकर पालन भी करवाया किंतु दूसरी और बड़े-बड़े लाखों की जनसंख्या एकत्रित कर राजनीतिक कार्यक्रम करवाये गए। जब देश इस भयानक बीमारी से लड़ रहा था और कई राज्यों में लॉकडाउन, कोरोना कर्फ्यू चल रहा था, तब आप स्वयं चुनावी सभाओं में लाखों की संख्या में जमा लोगों को सम्बोधित कर वोट मांग रहे थे। और तभी अस्पतालों के बाहर आम जनमानस बेड, ऑक्सीजन, दवा मांग रहा था और अब भी वही हालात है। क्या देश की अवाम की जान की कीमत से ज्यादा जरूरी चुनाव करवाना था ?

चुनाव करवाने के अतिरिक्त उसका समय बढ़ाने का कोई प्रावधान नही है क्या ?

आगे लिखा है कि, आपने लाखों की संख्या में चल रहे किसान आंदोलन को भी समाधान कर समाप्त नही करवाया है। क्या यहां कोरोना के आने की संभावना नही थी ? आप चुनावी तैयारियों में समय न देकर एक वर्ष से आप कोरोना महामारी से लड़ने के लिए पूरा समय देते तो आज के हालात सुधरे हुए हो सकते थे। आज किसी ने मॉं-पिता तो किसी ने भाई, बहन, बेटे खो दिए है और यह अपूरणीय क्षतियां आज भी जारी है। आम नागरिक हर तरह की मार झेल रहा है। इन तमाम तरह की लापरवाही व गैर-जिम्मेदार घटनाक्रम ने आज आपसे इस्तीफा मांगने के लिए मजबूर कर दिया है।

पाटीदार ने विनम्र अनुरोध करते हुए कहा है कि,

नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अतिशीघ्र इस्तीफा देकर स्वयं का सम्मान व पद की गरिमा बनी रहें, ऐसा उचित कदम उठायें।

 
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